कलीसिया के मूल सिद्धांत

क्या कलीसिया में प्रचलित हर धार्मिक प्रथा वास्तव में बाइबल पर आधारित है? या समय के साथ कुछ परंपराएँ ऐसी बन गई हैं जिन्हें लोग बिना जाँच-पड़ताल के स्वीकार करते चले आ रहे हैं?

कलीसिया के मूल सिद्धांत: पवित्रशास्त्र और परंपरा एक ऐसी पुस्तक है जो पाठकों को कलीसिया की कुछ महत्वपूर्ण प्रथाओं को परमेश्वर के वचन के प्रकाश में समझने और परखने के लिए प्रोत्साहित करती है।

इस पुस्तक में बपतिस्मा, पवित्र भोज और दशमांश जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है। बातचीत के सहज और रोचक माध्यम से तीन काल्पनिक पात्र, जैक, बेन और फिली, इन विषयों से जुड़े प्रश्नों पर विचार करते हैं। उनके संवाद पाठकों को प्रचलित मान्यताओं पर विचार करने और यह समझने में सहायता करते हैं कि वास्तव में पवित्रशास्त्र क्या सिखाता है।

इस पुस्तक का उद्देश्य किसी कलीसिया, व्यक्ति या संप्रदाय की आलोचना करना नहीं है। इसका उद्देश्य पाठकों को स्वयं बाइबल का अध्ययन करने, प्रश्न पूछने और परंपरा तथा पवित्रशास्त्र की शिक्षा के बीच अंतर समझने के लिए प्रेरित करना है।

इस पुस्तक में आप क्या जानेंगे?

  • बपतिस्मा: इसका वास्तविक महत्व क्या है? कौन बपतिस्मा ले सकता है और कौन दे सकता है?
  • पवित्र भोज: इसका उद्देश्य क्या है, इसे कहाँ और किसके साथ मनाया जाना चाहिए तथा कितनी बार मनाया जाना चाहिए?
  • दशमांश: इसकी उत्पत्ति क्या है? क्या पुराने नियम की दशमांश व्यवस्था आज भी उसी रूप में लागू होती है? नई वाचा में देने के विषय में परमेश्वर का वचन क्या सिखाता है?
  • परंपरा और पवित्रशास्त्र: क्या हम अपनी मान्यताओं को बाइबल के आधार पर परखते हैं या केवल परंपरा का पालन करते हैं?

यह पुस्तक आपको किसी निष्कर्ष को आँख बंद करके स्वीकार करने के लिए नहीं कहती। बल्कि आपको स्वयं पवित्रशास्त्र खोलकर पढ़ने, प्रार्थना के साथ अध्ययन करने और सत्य की खोज करने के लिए आमंत्रित करती है।


Book Details

  • Title: कलीसिया के मूल सिद्धांत: पवित्रशास्त्र और परंपरा
  • Language: Hindi
  • Author: Richwords
  • Publisher: Richwords
  • Publication Year: 2026
  • Edition: First Edition
  • Pages: 100 (printed page numbering; 106 PDF pages)

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